'नन्हें' कसाई...
जिसमें शामिल साले साली, सास के आने की बात, उससे बढकर और क्या हो दिल के घबराने की बात, सस्ते!हम फ़ाकामस्तों को नादीदः मत समझ, भूख में होठों पे आ ही जाती है खाने की बात, कूचा-ओ-जानाँ में जबसे सिर फ़ुटव्वल हो गई, अहतियातन अब नहीं करते वहाँ जाने की बात,...
[पूरी पोस्ट]
ऋतेश त्रिपाठी
37
3
0
3
2
[12 May 2009 13:20 PM]



Shuffle








