मायावती, अम्बेदकर, सेक्यूलरिज्म और बीजेपी

और जाओ... जला कर राख कर दो वैशाली को इस आग में.... मा यावती ने सत्ता हासिल करने के लिए जितनी भी कलाबाजियां खाईं हों लेकिन उनकी पार्टी अम्बेदकर के विचारों को ही पूरा करने का दंभ भरती है। कई लिखित साक्ष्यों से ये साबित हुआ है कि अम्बेदकर के मन में इस्लाम को लेकर कोई अच्छी धारणा नहीं थी। अम्बेदकर ने जब... [पूरी पोस्ट]
writer sushant jha
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[12 May 2009 10:00 AM]

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