रूहानी जलसे

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai तुम जिस को भी याद रहे । और किसे वह याद करे ॥ जिसको याद नहीं हो तुम कौन उसे फिर याद करे ॥ माइक, मंच, मंत्रियों बिन सूने रूहानी जलसे ॥ गूंगे, बहरों की महफ़िल कौन सुने औ' कौन कहे ॥ साठ बरस से देख रहे फिर भी पूछ रहे हमसे ॥ दो बीते, बाक़ी दो दिन जैसे वो, ये... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai
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[12 May 2009 08:06 AM]

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