चित्रकथा

Chashmebaddoor भूले हुए लम्हों का पता याद आया मेरी मां बहुत भोली बचपन के दिन, दोस्तों की होली वो गांव मेरा घर छोटे छोटे खेल बचपन का सफर छोटा सा कंधा वो बड़ा सा बस्ता कभी हुई हार, पर याद है जब मैं जीता गांव से दिल्ली शहर में आए बढ़ते ही गए कोई रोक न पाए घोषित हुआ जब... [पूरी पोस्ट]
writer अपराजिता
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[12 May 2009 07:03 AM]

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