मैं लहर हूं, सागर में खो जाती हूं............

MERA SAGAR सच कहना क्या तुम भी मेरा, दर्द समझते हो? पत्थर से टकराना, फिर बहजाना, क्या अर्थ समझते हो? न मिल पाना अपनों से, घुट कर रह जाना, जीवन है संघर्ष मेरा, न कुछ पाना, बस खोते जाना, क्या ये सच, समझते हो? मैं रोऊं भी तो, क्यों कर, न इसका एहसास तुम्हे होगा। तु... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL
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[11 May 2009 21:22 PM]

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