समय की पहचान

POEM OF SOUL आसमान में सूरज अपनी बिना आहट की गती से चलता हुआ, वहीं, अन्दर कमरे में, घड़ी की सुईयां आहट करती हुईं, सन्नाटे को चीरती हुई, टक...टक...टक... आसमान से गिरती दूरियों को भेदती गर्म तबे की लौ, सुइयां टक...टक...करती हुई दोनों निरंतर चलते हुए मार्गदर्शित करत... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj
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[11 May 2009 21:10 PM]

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