संवेदनाएं आख़िर क्यों........

pungibaaj बहुत दिन हुए अपने आप को जिए हुए। संवेदनाएं कभी अकेले जीने नहीं देती हैं बहुत कोशिश की कि कोई रास्ता निकले पर ऐसा नहीं हो सका। खासकर उन मौंकों पर जब मुझसे मुझे साक्षात्कार करने का मौका मिलना हो तो मैं कभी सफल नहीं हो पाता। ऐसा क्यों होता है कि किसी एक... [पूरी पोस्ट]
writer sanjeev persai
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[11 May 2009 08:12 AM]

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