हलचल है भूचालों में

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai जब से तेरे ख्यालों में । घेरें लोग सवालों में ॥ तिनके चार क्या रखे हमने हलचल है भूचालों में ॥ अंधियारे में घबराता वो सहमे तेज उजालों में ॥ एक झोंपडी पर कब्जे को झगड़ा महलों वालों में ॥ सहमा-सहमा घर का मालिक जब से है रखवालों में ॥ दिल में दुनियादारी रख... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai
views
25
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[11 May 2009 05:04 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix