हलचल है भूचालों में
जब से तेरे ख्यालों में । घेरें लोग सवालों में ॥ तिनके चार क्या रखे हमने हलचल है भूचालों में ॥ अंधियारे में घबराता वो सहमे तेज उजालों में ॥ एक झोंपडी पर कब्जे को झगड़ा महलों वालों में ॥ सहमा-सहमा घर का मालिक जब से है रखवालों में ॥ दिल में दुनियादारी रख...
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joshi kavirai
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[11 May 2009 05:04 AM]



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