अब देश पर `राज' के लिए जोड़तोड़ की बारी

कलम का सिपाही भारतीय लोकतंत्र का महापर्व अब खत्म हो चला । यह आलेख लिखते वक्त इसका आखिरी और पांचवां चरण हालांकि बाकी है लेकिन इसे अब पूर्ण मान लेते हैं। धूप में तपते, गली-कूचों, गांव-मुहल्लों की धूल फांकते नेताओं को परिणाम और उसके बाद की परिस्थितियों का इंतजार है।... [पूरी पोस्ट]
writer Rajesh Tripathi राजेश त्रिपाठी
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[11 May 2009 01:43 AM]

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