गजल -- हम बहारे जिन्दगी की आरजू लिखते रहे -- वीनस केसरी

आते हुए लोग हम बहारे जिन्दगी की आरजू लिखते रहे कुछ पुराने घाव थे जो उम्र भर रिसते रहे . वो हमारी जिन्दगी में छा गए कुछ इस तरह ख्वाब में भी आ के हमसे तयशुदा मिलते रहे . वो हमारे साथ चलने के लिए तैयार थे मेरे दिल में जाने कैसे मखमसे पलते रहे . हमने मांगी छांव जब भ... [पूरी पोस्ट]
writer venus kesari
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[10 May 2009 15:13 PM]

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