दिल ढूंढता है फिर वही...........

MERA SAGAR दिल ढूंढता है फिर वही, मां का आंचल। जिसकी छाया में सारे दिन की थकान, छूमंतर हो जाती। जिसके हाथों की गरमाहट, माथे को सहलाती, अपने होने का एहसास कराती, और हर मुश्किल आसान हो जाती। दिल ढूंढता है फिर वही, मां का आंचल। कुछ कहने से पहले ही, सब कुछ समझ जाती... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL
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[10 May 2009 12:32 PM]

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