चदरिया

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai हम उनको समझाने निकले । मतलब धोखा खाने निकले ॥ नाम बताएँ हम किस-किस का । सब जाने पहचाने निकले ॥ जिन्हें हकीक़त समझा हमने । वो केवल अफ़साने निकले ॥ जिनमें खोये रहे उमर भर । वो सब ख़्वाब पुराने निकले ॥ सब बच निकले पतली गलियों । एक हमीं टकराने निकले ॥ चार... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai
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[10 May 2009 03:46 AM]

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