'मां'

हिमाल : अपना-पहाड़ मां के लिए... जिसने बचपन से आज तक हर दम जीने का अहसास दिया है। ) तुम शक्ति हो / शक्तिशाली तुममें उर्वरता है / अंकुरण क्षमता भी तुममें है / सह सकने की क्षमता तुममें लोचकता है आकर्षण भी / उच्च कोटि का बसता है तुममें ममता का रस / हरदम रिसता है तुम पा ले... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट
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[10 May 2009 02:08 AM]

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