कवि, कविता और साहित्य
किसी ने मधुशाला का गान किया, किसी ने सोमरस का पान किया, मैं अलबेली क्या करती खाली, मैंने साहित्य की ओर रुझान किया। जिन्दगी ने करवट ली ऐसी, कि मैंने कवियों का सम्मान किया, ये दुनिया बहुत निराली हैं, कवियों कि हर अदा मतवाली हैं। यहाँ तो सुख का सागर हैं...
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Priya
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[10 May 2009 01:44 AM]



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