मेरा डर

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai उनका प्यार तसव्वुर निकला । कितना सच मेरा डर निकला ॥ किया जहाँ भी रैन बसेरा । बटमारों का ही घर निकला ॥ सबको साया देने वाला । आँचल आँसू से तर निकला ॥ सभी संगसारों की ज़द में केवल मेरा ही सर निकला ॥ उनका ख़त बिन पढ़ा रह गया सारा तंत्र निरक्षर निकला ॥ जीव... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai

व्यंग्य

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[10 May 2009 01:35 AM]

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