दबे पांव...दूर कहीं

POEM OF SOUL तुम कहती हो, तुम्हारे हाथों की लकीरों में मैं नहीं। मैं कहता हूं, मेरे मुकद्दर की लकीरें सिर्फ तेरी हैं। तेरे ख्वाबों में, मैं ना सही मगर, मेरे ख्वाब में, सिर्फ तुम ही तुम हो। तुम गुजर गई, मेरे पास से, तो यूं लगा मुझे, कि जिंदगी गुजर गई, दबे पांव...द... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj
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[09 May 2009 20:59 PM]

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