ऐ मां तेरी सूरत से बढकर भगवान की सूरत क्या होगी...
बेसन की सोंधी रोटी पर, खटी चटनी जैसी मां, याद आती है, चौका बासन, चिमटा-फुंकनी जैसी मां, बीवी, बेटी, बहन पडोसन थोडी-थोडी सबमें दिनभर एक रस्सी के उपर चलती नटनी जैसी मां। निदा फाजली साहब की इन पंक्तियों के साथ मदर्स डे पर पेश है यह तस्वीर-...
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ashabd
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[09 May 2009 13:57 PM]



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