क़लम & कलम...

सस्ता शेर यूँ भी नौजवानों से मायूस है अहल-ए-क़लम, जबकि मेरा मशवरा एक नौजवाँ को भा गया, मैनें कहा हज़रत क़लम पर भी तवज्जो दीजिए, अगले ही हफ़्ते नौजवाँ कलमें बढा कर आ गया !!... [पूरी पोस्ट]
writer ऋतेश त्रिपाठी
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[09 May 2009 13:49 PM]

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