अनिश्चितता में...

किस्सा-कहानी ट्रेन धडधडाती हुई प्लेटफार्म से आ लगी थी। ट्रेन के आते ही लोगों की गहमागहमी अचानक ही बढ़ गई थी। यहाँ से वहां लाल यूनिफार्म में दौड़ते कुली , डिब्बे में जगह लेने को बेताब यात्री। और इस भीड़ से घिरा मैं। मैंने भी अपना सूटकेस और बैग सम्हाला और एक डिब्बे... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना अवस्थी दुबे
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[09 May 2009 03:07 AM]

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