अपनी पीढी़ के लिए
अरुण कमल की एक कविता अपनी पीढी के लिए वे सारे खीरे जिनमें तीतापन है हमारे लिए
वे सब केले जो जुड़वां हैं
वे आम जो बाहर से पके पर भीतर खट्टे हैं चूक
और तवे पर सिंकती पिछली रोटी परथन की
सब हमारे लिए
ईसा की बीसवीं शाताब्दी की अंतिम पीढी के लिए
वे सारे यु...
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PRIYANKAR
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[08 May 2009 08:18 AM]



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