यादों में बसे लोग- 2
कुल्हाड़ी फेंक के नहीं, थाम के मारो कॉमरेड... 1984 में मैट्रिक की परीक्षा पास कर मैं पटना के सैदपुर छात्रावास में अपने बड़े भाई से साथ रहने लगा। कथाकार हंसकुमार पांडेय भी साथ रहा करते थे। पांडेय जी कहानियों में ही नहीं, सामान्य बातचीत में भी कथा बुनत...
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राजू रंजन
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[08 May 2009 06:40 AM]



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