"फिर किसी याद ने रातभर है जगाया मुझको"
फिर किसी याद ने रातभर है जगाया मुझको, क्या सजा दी है मोहब्बत ने खुदाया मुझको, दिन को आराम है ना रात को है चैन कभी, जाने किस खाक से कुदरत ने बनाया मुझको, दुख तो ये है कि जमाने में मिले गैर सभी, जो मिला है वो मिला पराया मुझको, जब कोई भी ना रहा कांधा मे...
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दिल का दर्द
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[08 May 2009 03:35 AM]



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