'मां' चार कविताएँ
एक) मां ! क्या सूख गया है ? तुम्हारे स्तनों का दूध तुम्हारी आँखों का पानी या तुम्हारी ममता जो - संकट के बादल घिर आये हैं ! (दो) मां ! क्या नहीं है ? वह झूला वह रातें, वे परियां या वह लोरी जो, आखों से उड़ गयी है नींद ...! (तीन) मां ! यहाँ क्या छूटा है...
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आशेन्द्र सिंह
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[08 May 2009 01:12 AM]



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