प्रीत की रीत

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का आँखों में चमक , बात - बात में दमक, यू हीं लचक - लचक, गोरी चाल चलने लगे। आईने के संग, देख अपने ही रंग, केशो की भंवर, गोरी आप गढ़ने लगे। करके श्रृंगार, होके सखियों के साथ, गोरी बात - बेबात, यू ही आहें भरने लगे। सखी के सवाल, उसे करे परेशान, गोरी आँख नीच... [पूरी पोस्ट]
writer Priya
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[07 May 2009 07:16 AM]

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