फरीद के श्लोक - ३१

*साधना* कंधी उते रुखड़ा किचरकु बंनै धीरु॥फरीदा कचै भांडे रखीऎ, किचरु ताई नीरु॥९६॥फरीदा महल निसखण रहि गऎ,वासा आइआ तलि॥गोरां से निमाणीआ,बहसनि रूहां मलि॥८७॥फरीदा मऊते दा बंना ऐवै दिसै, जिउ दरीआवै डाहा॥अगै दोजकु तपिआ सुणीऎ,हूल पवै काहारा॥इकना नो सभ सोझी आई,इकि फि... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली
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[07 May 2009 03:47 AM]

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