मत करें दान, करें मतदान

जिरह गीदड़ कहता शेर से नया जमाना देख एक वोट तेरा पड़ा मेरा भी है एक पता नहीं किसकी पंक्तियां हैं यह। पर यह सच है कि वह जमाना लद गया जब शेर जैसे लोग बाकी तमाम लोगों को गीदड़ सरीखा समझते थे। अपनी गीदड़ भभकियों से सबको डराते फिरते थे। साथियो, लोकतंत्र का यह... [पूरी पोस्ट]
writer अनुराग अन्वेषी
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[06 May 2009 15:42 PM]

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