कई सवाल सदियों से हवा में खड़े हुए हैं....
पिछली कड़ी में " कलम मेरी कुम्हारिन हुई " में कुछ अमृता जी कि लिखी पंक्तियाँ जो मुझे विशेष रूप से पसंद है वह मैंने वहां पोस्ट की ,पर देखा हर किसी को किसी न किसी पंक्ति ने छुआ ,अमृता का लिखा यही असर करता है ,कि व्यक्ति विशेष अपने आस पास खुद को उसी से ज...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[06 May 2009 08:47 AM]



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