बेटियां

मोहन का मन जब बेटी के होने पर खुशी मनती थी आजकल क् ‍ या हुआ इस दुनिया को कहां गई वो सुशील सुनैयना और वो घर की लक्ष् ‍ मी कहलाने वाली आखिर क् ‍ या कसूर है इनका जो इनको इस जहां में आने से पहले ही भेज दिया जाता है दूसरे जहां की ओर जो आज मां है कल वो भी किसी की बेट... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन वशिष्‍ठ
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[06 May 2009 05:29 AM]

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