उससे जुदा हो गया मैं....
मई 09 मैं ये सोचकर उसके दर से उठा था कि वो रोक लेगी मना लेगी मुझको हवाओं में लहराता आता था आंचल कि दामन पकड़कर बिठा लेगी मुझको कदम ऐसे अंदाज में उठ रहे थे कि आवाज देकर बुला लेगी मुझको मगर उसने रोका ना उसने बुलाया न दामन ही पकड़ा न मुझको बिठाया न आवाज...
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अनिल कुमार वर्मा
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[05 May 2009 14:41 PM]



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