प्रज्ज्वलित है पलाश आज
प्रज्ज्वलित है पलाश आज ..... फ़िर से उठी है उमस अलसाई सी घास निर्निमेष निहारती अरुण पुष्पों के कटाव पलाश का हर उतार - चढाव कच्चे कोपलों की अग्नि में ज्यों निष्ठुर का तप्त छल और हर अन्तर का पराग ज्यों प्रिय का चिर अनुराग प्रज्ज्वलित है पलाश आज ...........
[पूरी पोस्ट]
swati
46
8
0
8
9
[05 May 2009 07:39 AM]



Shuffle








