मैं प्यार का समन्दर..........
अहसास में, डुबो कर, प्यार की, कलम से, लिख दिए, जज़्बात, जो खिल रहे, कमल से। मैं डोर से बंधी हूं, तेरे प्यार का है बंधन, तुम डूब जाओ मुझमें, मैं प्यार का समन्दर। मैं मोम-सी पिघल कर, तेरी सांसों में बसूंगी, तुम जबभी पलके मूंदों, बस मैं ही मैं दिखूंगी।...
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PREETI BARTHWAL
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[05 May 2009 05:51 AM]



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