एक परिंदे की कहानी

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का मेरे घर के आगन में, परिंदे रोज आते हैं, ची-ची करते, फुदकते, दाने चुगते , कटोरे का पानी पीते, और फिर उड़ जाते, वो कलरव, वो अठखेलिया, वो मनोरम द्रश्य, दिल को भाते ....... और मेरे तनाव उनकी परवाज़ में उड़ जाते , एक दिन, एक चिया ज्यादा हिम्मत दिखा गई, आँगन... [पूरी पोस्ट]
writer Priya
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[05 May 2009 04:55 AM]

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