कल रात फलक का चाँद फुटपाथ पर था...

मीत देर तक वो मुझसे बात करता रहा... पोंछने को बार बार पसीना, अपनी हथेलियों को चेहरे पे मलता रहा, पसीने से उसका भी बदन, तरबतर था... हाँ! कल रात फलक का चाँद फुटपाथ पर था... बोला यार... "यहाँ तो हवा बहुत गरम है, तुम्हारे बिछोने में अग्नि की तपन है, किस तरह... [पूरी पोस्ट]
writer मीत
views
31
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
15
[04 May 2009 04:01 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix