कल रात फलक का चाँद फुटपाथ पर था...
देर तक वो मुझसे बात करता रहा... पोंछने को बार बार पसीना, अपनी हथेलियों को चेहरे पे मलता रहा, पसीने से उसका भी बदन, तरबतर था... हाँ! कल रात फलक का चाँद फुटपाथ पर था... बोला यार... "यहाँ तो हवा बहुत गरम है, तुम्हारे बिछोने में अग्नि की तपन है, किस तरह...
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मीत
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[04 May 2009 04:01 AM]



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