आगरा हो या दिल्ली : हालात हर जगह एक से हैं

जिरह नमिता शुक्ला को दिल्ली आए हुए अब साल भर होने जा रहा है। स्वभाव से वह निर्भीक हैं और पेशे से पत्रकार। वह मानती हैं कि डर नाम का भाव हम सबों के भीतर बसा होता है। और कोई भी छोटी-सी घटना उस डर को उभार सकती है। तकरीबन दो साल पहले आगरा के एक अखबार से बतौर... [पूरी पोस्ट]
writer अनुराग अन्वेषी
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[04 May 2009 03:16 AM]

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