सर्दियां १

दिल के दरमियाँ PRESENTS छत हुई बातून वातायन मुखर हैं सर्दियाँ हैं। एक तुतला शोर सड़कें कूटता है हर गली का मौन क्रमशः टूटता है बालकों के खेल घर से बेख़बर हैं सर्दियाँ हैं। दोपहर भी श्वेत स्वेटर बुन रही है बहू बुड्ढी सास का दुःख सुन रही है बात उनकी और है जो हमउमर हैं सर्दियाँ... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ० कुअँर बेचैन
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[04 May 2009 02:26 AM]

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