अब नीँद नहीं आती

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... इन सपनों की वजह से अब नीँद नहीं आती, कहीं खोया रहता हूँ, कोई चीज़ मुझे नहीं भाती, हर सपने में कुछ यादें, कुछ तस्वीरें हैं, जो धकेलती हैं मुझे बीते दिनों में, तो कुछ राहें इतनी बुरी हैं कि, आने वाली मंज़िलों के बारे में कुछ नहीं बताती, सुना है कहीं एक अ... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[04 May 2009 01:13 AM]

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