कोशीक ताण्डव- प्रो. (डॉ.) अशोक सिंह तोमर
यौ भाय! कहाँ छै न्याय हमरा लेल? कहाँ छै देवी आ देवता? निबर आ दुबर केँ देखनिहार ओकर दुःख आ व्यथा सुननिहार कियो नहि अछि। पचास बरखक बाद कोशीमाय अपन पुरना मार्ग सँ उठैत-बजरैत जल प्रलयक महाताण्डव सँ गामक-गाम विलीन कs देलकैत। कियो नहि बचि सकलैक जे कियो बचल...
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सम्पादक: कतेक रास बात
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[03 May 2009 11:18 AM]



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