चुनाव के नाम पर न कोई ’खंडिस्तान’ चाहिये [कविता] - श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'
हिन्दू न ढूँढ़ता हूँ मैं.. न मुसलमान चाहिये पहचान ढूँढ़ता हूँ बस.. पहचान चाहिये हिन्दू मिले और बौद्ध जैन सिख मिल गये अगड़े मिले पिछड़े मिले पर 'हम' ही रह गये कोई पूछने लगा क्या सवर्ण हो तुम..? मण्डल और कमण्डल की ना दुकान चाहिये पहचान ढूँढ़ता हूँ पहचा...
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श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
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[02 May 2009 13:54 PM]



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