है कर्ज उस शहीद का
वो भी लाल था किसी मात का वो भी नूर था किसी आँख का जो जला के अपनी ख्वाहिशें तेरे आज को सजा गया ! ए- नौजवां तू जाग अब ना जी मति को मारकर जो खा रहे है देश को दबोच और प्रहार कर ! जो भोग सारे त्याग कर ख़ुद कफ़न को बांधकर लहू की हर एक बूँद को वतन की भेंट कर...
[पूरी पोस्ट]
निर्झर'नीर
23
2
0
2
9
[02 May 2009 05:24 AM]



Shuffle








