वो कातिल अदा उफ़ ...
लगातार बड़ी बहर पे लिखने के बाद एक छोटी बहर की ग़ज़ल आप सभी के सामने लेकर आया हूँ आर्शीवाद गूरू देव का है, आप सभी का भी स्नेह और आर्शीवाद चाहूँगा .... बहर .... १२२ १२२ फ़ऊलून फ़ऊलून वो कातिल अदा उफ़ वो हुस्न-ऐ शबा उफ़ ॥ है दीवाने हम पर हां तेरी वफ़ा उफ़...
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"अर्श"
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[01 May 2009 09:14 AM]



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