'हवा उद्दंड है'
अन्नू..... उठ जाओ, छह बज गए हैं।" मम्मी की आवाज़ के साथ ही मेरी आँखें खुल गई थीं। क्या मुसीबत है! ऐसे कडाके की ठण्ड में उठना होगा! यदि इस वक्त ज़रा भी आलस किया तो 'बस ' के समय तक तैयार होना बड़ा मुश्किल होगा। बस का ख्याल आते ही एक झटके से रजाई फ़ेंक उठ...
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वन्दना अवस्थी दुबे
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[01 May 2009 07:37 AM]



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