कितना मुश्किल है...

हिमाल : अपना-पहाड़ कितना मुश्किल होता है, ख़ुद को समझ पाना भी । पल में तोला, पल में माशा होता है आदमी ।। प्यार को प्यार, मिल ही जाए ये नहीं होता । देखो प्यार करके भी, वो तनहा रहता है ।। कौन कहता है ? कुछ नहीं मिला... दर्दे यार से । ये जो ज़िंदगी है, उसका इंतज़ार है ।।... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट
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[01 May 2009 06:25 AM]

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