बापू की कामांधता ने ले ली उनके पिता की जान
मात्र तेरह वर्ष की आयु में विवाह के उपरांत गांधीजी की कामांधता बेकाबू हो उठी थी, इस कामांधता से कस्तूरबा त्रस्त थीं। लेकिन इससे मुक्त होने के लिए 1906 तक प्रतीक्षा करनी थी, जब गांधीजी ने ब्रह़मचर्य का व्रत लिया। गांधीजी के पिता की मौत के समय की घट...
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ashabd
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[01 May 2009 03:45 AM]



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