वह तोड़ती पत्थर

varsha इस कविता को पोस्ट करने के लिए जो भूमिका पहले मैंने सोची थी वो ये कि मज़दूर दिवस है आज, धोती पहने, अंगोछा डाले, महिलाएं फटी पुरानी साड़ी पहने, मैले-कुचैले से दिखते लोग जिन्हें हम मज़दूर कहते हैं, उनकी नुमाइंदगी करता ये दिन। नहीं, मज़दूर तो हम भी हैं,... [पूरी पोस्ट]
writer वर्षा
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[01 May 2009 02:36 AM]

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