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गीत ज़िंदगी का राग हो , वक़्त का वह शोर हो तुम , जो बुन न पाया गीत कोई , यूँ बहुत मुँह ज़ोर हो तुम / / तुम न जाने क्या रहे हो , आज तक अग्यात है यह , पर अलग ही हो शु भे तुम , राज की ही बात है यह / / गीत की अंतिम कड़ी हो , ज़िंदगी से भी बड़ी हो , आज भी...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[30 Apr 2009 13:54 PM]



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