जूते का निशाना
जूते ने अब जो अपना सर उठाया है पैरों से निकल जो बाहर को आया है अपनी हस्ती को मिटाया है तो पूरी दुनिया में छाया है जिसकी नियति थी पैरों तले रहना अब बन गया लोकप्रियता का गहना पैरों से निकाल जूता सभा में चलाते हैं चन्द पलों मे दुनिया में छा जाते हैं विद...
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सीमा सचदेव
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[30 Apr 2009 09:03 AM]



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