जूते का निशाना

मेरी आवाज़ जूते ने अब जो अपना सर उठाया है पैरों से निकल जो बाहर को आया है अपनी हस्ती को मिटाया है तो पूरी दुनिया में छाया है जिसकी नियति थी पैरों तले रहना अब बन गया लोकप्रियता का गहना पैरों से निकाल जूता सभा में चलाते हैं चन्द पलों मे दुनिया में छा जाते हैं विद... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा सचदेव
views
13
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
2
[30 Apr 2009 09:03 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix