ज़िंदगी का पहला लम्हा......जब हर लम्हा तुम्हें खुश देखा.......

mahua मन.....बहुत परेशान करता ये मन.....क्या सबके साथ ऐसा ही करता....उनका भी मन....या ये सब सिर्फ मेरे लिए ही......एक बार फिर वहीं वापस जाने जैसा मन...मन को कैसे कोई समझाए..जिसके पीछे वो भागता.......वो उससे सिरा तोड़कर आगे बढ़ गया......ये मैं या फिर सिर्फ... [पूरी पोस्ट]
writer tanu sharma.joshi
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[30 Apr 2009 04:26 AM]

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