कलम मेरी कुम्हारिन हुई ......
अक्ल इल्म की माटी भीगी कलम मेरी कुम्हारिन हुई गीत जिस तरह जाम ,चाक से ---- अभी अभी हो गये हो उतारे ... दिल की भट्ठी आग जलाई दोनों हाथ उम्र खर्च कर एक शराब हज़ार - आताशा महफ़िल में हम ले कर आये सदियों ने निश्वास लिया इक कैसा शाप दिया है हमको जीवन बाला र...
[पूरी पोस्ट]
रंजना [रंजू भाटिया]
36
5
0
5
18
[30 Apr 2009 03:47 AM]



Shuffle








