कलम मेरी कुम्हारिन हुई ......

अमृता प्रीतम की याद में..... अक्ल इल्म की माटी भीगी कलम मेरी कुम्हारिन हुई गीत जिस तरह जाम ,चाक से ---- अभी अभी हो गये हो उतारे ... दिल की भट्ठी आग जलाई दोनों हाथ उम्र खर्च कर एक शराब हज़ार - आताशा महफ़िल में हम ले कर आये सदियों ने निश्वास लिया इक कैसा शाप दिया है हमको जीवन बाला र... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[30 Apr 2009 03:47 AM]

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