विस्थापित
कवियत्री- सुश्री कामिनी कमायनी बड्ड दिन भेलए देस कोस सँ दूर, मोन जेना भसिआएल बूढ़ सन हेराए गेलए, किओ ककरो कल्लोल कए कि गाम मोन पड़ल, मुदा कोन गाम ठाम की, कतेको गाम आ शहरि मे भटकैत दिन, एक दिन उदास पुछैत चित सँ, जन सँ कि वित्त सँ, पूर्ण भेल रिक्त की लज्...
[पूरी पोस्ट]
सम्पादक: कतेक रास बात
36
1
0
1
4
[30 Apr 2009 03:37 AM]



Shuffle








