नेता को नुमाइंदा नहीं, आका मानते हैं हम

एक हिंदुस्तानी की डायरी एक तरफ हम राजनीति में पढ़े-लिखे काबिल लोगों के अभाव का रोना रोते हैं, दूसरी तरफ पढ़े-लिखे काबिल लोग चुनावों में खड़े हो जाते हैं तो उनकी जमानत जब्त हो जाती है। साफ-सी बात है कि ‘हम’ चुनावों में किसी की जीत-हार का फैसला करने की स्थिति में नहीं हैं। गा... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल रघुराज
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[29 Apr 2009 20:49 PM]

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